Wednesday, 2 October 2013
Shayari
कहते हैं कि पत्थर दिल किसी के लिए;
आंसू नहीं बहाते पर सच ये भी है कि;
नदियाँ पहाड़ों से ही निकलती है।|
किसी को पाने में वक़्त लगता है;
किसी को अपनाने में वक़्त लगता है;
हमने बहुत पहले मांगी थी आपकी दोस्ती;
पर खुदा ने कहा अनमोल चीज को पाने में वक़्त लगता है।
जाने कब से तरस रहे है
जाने कब से तरस रहे हैं, हम खुल कर मुस्कानें को;
इतने बन्धन ठीक नहीं हैं, हम जैसे दीवानों को;
लिये जा रहे हो दिल मेरा, लेकिन इतना याद रहे;
बेच न देना बाज़ारों में, इस अनमोल ख़जाने को;
तन की दूरी तो सह लूँगा, मन की दूरी ठीक नहीं;
प्यार नहीं कहते हैं केवल, आँखों के मिल जाने को;
यह अपना दुर्भाग्य विधाता, ने तन दिया अभावों का;
मन दे दिया किसी राजा का, जग में प्यार लुटाने को;
सुख-दुख अगर देखना है तो, अपने चेहरे में देखो;
होंठ मिले हैं मुस्कानें को, आँखें अश्क़ बहाने को।
काश की खुदा ने दिल पत्थर के बनाये होते;
तोड़ने वाले के हाथों में जख्म तो आए होते।
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